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ममता मिश्रा के इलाज से शगुफ्ता खातून की बिगड़ी तबियत जान गई हुसैनाबाद अस्पताल में husainabad news rbc channel


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हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल में उपस्थित पदाधिकारी

हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब इलाज के दौरान शगुफ्ता खातून (21 वर्ष) की मौत हो गई।

परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और ऑन-ड्यूटी चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया।

इस घटना ने न केवल हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए बल्कि यह भी उजागर किया कि इलाके में महिला चिकित्सकों की भारी कमी है।

गर्भपात के बाद बिगड़ी शगुफ्ता खातून की तबीयत

मृतका शगुफ्ता खातून की शादी दिसंबर 2024 में हुई थी।

वह रोहतास जिले के केरपा गांव निवासी तुफैल खान की पत्नी थी।

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परिजन बिलखते हुए

उनके पति हाल ही में विदेश कमाने गए थे, जिसके बाद शगुफ्ता कुछ दिनों के लिए अपने मायके आई थी।

ममता मिश्रा के अस्पताल में हुआ था प्रेग्नेंसी टेस्ट और गर्भपात

सूत्रों के अनुसार, शगुफ्ता खातून का 3 मार्च 2025 को ममता मिश्रा के अस्पताल में प्रेग्नेंसी टेस्ट हुआ था।

बताया जाता है कि बल्ड टेस्ट  3/3/2025 को पलामू पैथोलॉजी में कराया गया था। 

बाद में ममता मिश्रा के अस्पताल में ही उसका गर्भपात कराया गया।

गर्भपात के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया।

अनुमंडलीय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत, डॉक्टर ने बंद कर लिया दरवाजा

जब शगुफ्ता की हालत ज्यादा बिगड़ी, तो परिजनों ने उसे अनुमंडलीय अस्पताल लाया।

ऑन-ड्यूटी डॉक्टर आकाश खालको ने मरीज को सलाइन और इंजेक्शन लगाया।

डॉक्टर ने पहले कहा कि सब ठीक है, लेकिन कुछ देर बाद उसकी हालत और खराब होने लगी।

जब परिजनों ने बाहर ले जाने की बात कही, तो डॉक्टर ने रेफरल पर्ची छीन ली और अचानक घोषणा कर दी कि मरीज की मौत हो चुकी है।

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पदाधिकारी डॉक्टर रूम को खुलवाते हुए7

इस घोषणा के बाद अस्पताल में हंगामा मच गया।

परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया और हंगामा करने लगे।

भीड़ को देख अस्पताल में मौजूद अधिकांश स्वास्थ्यकर्मी इधर-उधर भाग गए।

डॉक्टर आकाश खालको ने खुद को अपने चैंबर में बंद कर लिया और दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया।

परिजन और ग्रामीण डॉक्टर को बाहर निकालने की मांग करने लगे।

हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल में महिला चिकित्सक नहीं, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल

इस घटना ने हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल में महिला चिकित्सकों की कमी को उजागर कर दिया है।

इलाज के लिए महिलाओं को अक्सर प्राइवेट क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है।

महिला मरीजों को जरूरी इलाज और सलाह देने के लिए कोई महिला डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।

इस वजह से गैर-कानूनी तरीके से निजी क्लीनिकों में गर्भपात जैसी प्रक्रियाएं की जा रही हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है।

प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ मामला

घटना की सूचना मिलते ही हुसैनाबाद थाना प्रभारी सोनू कुमार दल-बल के साथ पहुंचे और परिजनों को शांत करने का प्रयास किया।

अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) गौरांग महतो और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (DSP) एस मोहम्मद याकूब भी मौके पर पहुंचे।

उन्होंने डॉक्टर से दरवाजा खोलने को कहा, लेकिन डॉक्टर अंदर ही छिपे रहे।

जब उच्चाधिकारियों ने हस्तक्षेप किया, तब डॉक्टर ने दरवाजा खोला और पूछताछ शुरू हुई।

अस्पताल बना पुलिस छावनी, स्थानीय नेताओं ने की कार्रवाई की मांग

स्थिति को काबू में करने के लिए हुसैनाबाद, हैदरनगर और देवरी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।

राजद नेता जाकिर अली, मुखिया सुषमा देवी, अभय कुमार सिंह, प्रशांत कुमार सिंह ने मृतका के परिजनों से मुलाकात की और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

ममता मिश्रा के अस्पताल में गैर-कानूनी गर्भपात का खुलासा

शगुफ्ता खातून की मौत के बाद ममता मिश्रा के अस्पताल पर भी सवाल उठने लगे हैं।

ममता मिश्रा बिना लाइसेंस के गर्भपात जैसी प्रक्रियाएं करवा रही हैं, जो पूरी तरह गैर-कानूनी है।

भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट 1971 के तहत केवल अधिकृत अस्पतालों में ही गर्भपात कराया जा सकता है।

लेकिन ममता मिश्रा नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से गर्भपात करवा रही हैं, जिससे महिलाओं की जान को खतरा हो रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग – दोषियों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई

घटना के बाद हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने कहा कि नशे में रहने वाले डॉक्टरों को अस्पताल से तुरंत हटाया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ता अखलाक खान ने कहा कि डॉ. विकास गुप्ता भी ड्यूटी पर नशे की हालत में रहते हैं, उन्हें भी सस्पेंड किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग से मांग की गई है कि ममता मिश्रा के अस्पताल को सील किया जाए और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

क्या प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करेगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा? अब सबकी नजरें प्रशासनिक फैसले पर टिकी हैं।    

नोट

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