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हुसैनाबाद में मरहूम डॉक्टर नादिर अब्बास रिज़वी के चालीस के फ़ातेहा पर आयोजित मजलिस Palamu rbc channel husainabad news

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हुसैनाबाद न्यूज़ 


हुसैनाबाद के मशहूर  वक्फ वास्ला बेगम सदर इमाम बाड़ा में आयोजित हुई मजलिस


हुसैनाबाद नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या 09 निवासी मरहूम डॉक्टर नादिर अब्बास रिज़वी के चालीस के फ़ातेहा के मौके पर एक विशेष मजलिस का आयोजन किया गया। यह मजलिस मरहूम के एहसाल-ए-सवाब के लिए रखी गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग और अकीदतमंद शामिल हुए।


मजलिस का आग़ाज़ और सोज़-ओ-मर्सिया

इस रुहानी मजलिस की शुरुआत नाते रसूल और मर्सिया खानी से की गई। सोज़ और मर्सिया खानी का आगाज़ रज़ा इमाम साहब ने किया, जबकि सैयद अली हसन, अलखैबर और जमाल वार्षि ने अपने रुहानी कलाम से माहौल को गमगीन कर दिया।

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मौलाना इलियास हुसैन साहब वा अन्य


मौलाना इलियास हुसैन साहब का असरदार बयान – दिलों को झकझोर देने वाला खिताब

इस मौके पर विशेष रूप से कोलकाता से तशरीफ लाए आली जनाब मौलाना इलियास हुसैन साहब क़िब्ला ने हालात-ए-हाज़रा पर एक अत्यंत प्रभावशाली और दिल को झकझोर देने वाला खिताब किया। उन्होंने अपनी तकरीर में कुरआन और कर्बला के वाक़ियात का हवाला देते हुए इंसानियत, इंसाफ और आत्मावलोकन पर जोर दिया।


मौलाना इलियास हुसैन साहब ने अपने बयान में कहा:

"हर इंसान को अपनी ज़िंदगी में आत्मावलोकन करना चाहिए। दूसरों की गलतियां निकालने से पहले अपनी गिरेबान में झांकें।"

"जब कोई किसी दूसरे पर अंगुली उठाता है, तो उसकी तरफ उसके ही हाथों की तीन अंगुलियां उसकी अपनी तरफ भी इशारा करती हैं।"

"किसी का हक ना मारो, किसी के ऐब को ढांपो, उसे जलील और रुसवा ना करो।"

अगर किसी की गलती को उजागर करना भी है, तो उसे ऐसे बताओ कि उसकी इस्लाह (सुधार) हो जाए, लेकिन वह बदनाम और रुसवा ना हो।

"रहबर बनना आसान नहीं, रहबर वही होता है जो काम कराने वाले से अधिक काम करने की ताकत रखता है।"

"अपने कर्मों को देखो, अपनी गलतियों पर नादिम हो जाओ, ताकि अल्लाह की रहमत से नवाजे जाओ।"

खिताब ने भावुक कर दिया लोगों को

मौलाना इलियास हुसैन साहब के इन प्रभावशाली और रुहानी अल्फाजों ने मजलिस में बैठे लोगों को गहराई तक प्रभावित कर दिया। उनकी तकरीर सुनकर मजलिस में मौजूद कई लोग अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और रोने लगे।

मरहूम के लिए मग़फिरत की दुआ

मजलिस के आखिरी हिस्से में मरहूम डॉक्टर नादिर अब्बास रिज़वी की मगफिरत के लिए विशेष दुआ की गई। इस दौरान मौलाना इलियास साहब की हर सदा पर मजलिस में उपस्थित हजारों लोगों ने "आमीन" कहते हुए मरहूम की बख्शिश के लिए दुआएं कीं।

गणमान्य लोगों की मौजूदगी

इस पवित्र मजलिस में हुसैनाबाद के कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां भी शरीक हुईं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

युवा नेता: शेर अली

मोतव्वाली: तकी हुसैन रिज़वी

पूर्व मोतव्वाली: सैय्यद हसनैन जैदी

मौलाना: सैय्यद मुसवी रज़ा

गणमान्य नागरिक: आरजू खान, गुलाम मोहम्मद, अमीन अली खान

परिवार और शुभचिंतकों की भागीदारी

मजलिस का आयोजन मरहूम के छोटे भाई अमीर रिज़वी उर्फ गुड्डू साहब ने किया। इस मौके पर मरहूम के परिजनों और उनके शुभचिंतकों में शामिल रहे:


परिजन: सैयद इशरत हुसैन, तौकीर अब्बास उर्फ चिग्गी, ज़या रिज़वी, जीशान अब्बास, कासिफ अब्बास, हाशिम अली, हैदर अब्बास

अन्य स्नेहीजन: तकी रिज़वी, फिरोज रिज़वी, काजिम हसनैन, हाशिम अली उर्फ होमी, साबिर अली, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रामेश्वर राम, बबन सिंह, रविंद्र सिंह, रमेश सिंह, इलताफ हुसैन, मोहम्मद सगीर उर्फ मुबारक, मुनीश अली, कंबर हुसैन, विक्टर हुसैन, गज़फ़र हुसैन, मोहज़्ज़ब हुसैन, मोहसिन अली, मौलाना मुसवी रज़ा साहब, मुस्तफा खान, बाकर हुसैन, असद रज़ा उर्फ लल्ली, गौहर हुसैन उर्फ अनजनी, रेहान इलाहादी, और अन्य श्रद्धालु।

मजलिस ने छोड़ी गहरी छाप

इस मजलिस की संजीदगी और मौलाना इलियास हुसैन साहब के प्रेरणादायक विचारों ने मौजूद लोगों पर गहरी छाप छोड़ी। मरहूम डॉक्टर नादिर अब्बास रिज़वी की याद में आयोजित यह मजलिस सदियों तक याद रखी जाएगी और उनके एहसाल-ए-सवाब के लिए यह आयोजन एक प्रेरणादायक और भावुक कर देने वाला अवसर साबित हुआ।


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